India's Horoscope ( Part-2 )



नमस्कार,
               कल हमने भारत की कुंडली के बारे में बात की थी | भारत की कुंडली में हमने देखा के प्रथम, द्वितीय, एवं तृतीय भाव में क्रमश: राहु, मंगल, सूर्य-चन्द्र-बुध-शुक्र-शनि बिराजमान है | हमने फलकथन भी पढ़ा , जिसमे शुक्र-बुध और शनि की मित्रता अच्छा फल प्रदान करते हैं | 
                
               किन्तु, सूर्य-चन्द्र और शनि की युति भारत के उपर हावी हो जाते हैं | चन्द्र + शनि = मुश्केलियाँ , बाधाएँ को बढ़ावा देती हैं | शनि + सूर्य = शंका / परिश्रम करनेके बावजूद भी कम फल देना | सूर्य + चन्द्र = अन्धकारमय जीवन बना देता है |
               
               सांतवे भाव पर बिराजमान केतु, जो कार्यक्षेत्र में रूकावटे, बाधाएँ लाता है और रोग, कुदरती आफतों का सामना करना होता है |
    
              कल में ने एक प्रश्न कुंडली भी आपके सामने राखी हुई थी | उस प्रश्नकुंडली पर प्रकाश डाले तो, मिथुन लग्न है | मिथुन लग्न का स्वामी है बुध महाराज | बुध महाराज बुद्धि प्रदान करता है , बुध का ही मित्र राहु लग्न में होने के कारण मुश्केलियाँ आती हें पर उस मुश्केलियों का सामना करने के लिए हम भारतीय सशक्त भी है | 

             राहु के सामने के भाव पर बिराजमान केतु एवं गुरु | गुरु स्वराशि यानि की खुद के घर पर (धनराशि) हें | स्वराशि में गुरु होने के कारण ही भारत में कोरोना वायरस  के अंतर्गत मृत्यु बहोत कम हें बाकी देशों के मुकाबले में | 
            
            गुरु के साथ पाप ग्रह होने के कारण ही यहाँ पर वायरस फैला | किन्तु स्वराशी का गुरु होने के कारण ही हमें सभी देशों के मुकाबले हम बहोत ही खुशनसीब-वाले भी है |  
          
            आयुष्य भाव (आठवां  स्थान) में बिराजमान स्वराशी का शनी और शनी का मित्र ग्रह मंगल है| शनि और मंगल दोनों क्रूर ग्रह है | दोनों एक साथ होने के कारण भारत के वैद्य (डाक्टर) को हर समय सन्मान एवं सफलता भी मिलेगी किन्तु परिश्रम ज्यादा करना होगा |

          मंगल परिश्रमदायक ग्रह है ओर शनी न्यायदायक ग्रह | दोनों ग्रह भारत के हर नागरिक को परिश्रम करवाकर श्रेष्ठ फल प्रदान करेंगे |
         
         मुझे इस द्वितीय भाग में यह ही बात करनी थी की , अभी जिस तरह का माहोल बना हुआ है हमारे भारत और भारतीयों के उपर  कोरोना वायरस  इत्यादि , इस सब में हमें सफलता जरुर मिलेगी किन्तु  भारत की  विम्शोत्तरी दशा में चन्द्र की दशा चल रही है और चन्द्र के अंदर अंतरदशा है शनी की जो 10/07/2021 तक चलनेवाली है | 

        इस समय तक हमें बहोत ही सावधानी बरतनी होगी| शत्रुओ से , कुदरती आपदा से और हमारी संस्कृति - संस्कार की रक्षा करने हेतु हमें बहोत ही ठोस कदम उठाने होंगे | हमारे देश का कोषधन भी कमज़ोर हो सकता है जिसमे हमें ही सहायता करनी होगी |

        हम सब भारतवासी, आर्यपुत्र , हम सबको हमारे इष्टदेव - देवी को ही प्रार्थना करते रहना होगा | 
        
        भगवान् शिवजी  के चरणों में नतमस्तक होकर प्रार्थना करता हूँ की , विश्व में फैला हुआ यह संकट जल्दी ही नाश हो और हम सब पर आपकी कृपा बनी रहे |

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ||

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