India's Horoscope
जय भारत |🙏
भारत की कुंडली के बारे में देखा जाय तो, भारत के काल के बारे में नहीं पर हम सिर्फ और सिर्फ आज़ादी के वक्त की कुंडली पर ही हम यह सोच सकते हें की हमें क्या करना होगा, कब कौन-सी मुश्केलियाँ आ सकती है |
भारत देश सन 1947 , अगस्त , 14/15 की रात 12 बजे हमें आज़ादी मिली | उस समय की कुंडली को देखे तो,
वृषभ लग्न बैठता है , वृषभ राशि का स्वामी शुक्र जो की कर्क राशि में मित्र और सम ग्रहों के साथ बिराजमान है | ( मैंने कुंडली का चित्र उपर रखा हुआ है | आप देख सकते है | )
वृषभ लग्न के अंदर बिराजमान राहु ग्रह | राहु - शनि ग्रह का ही परम मित्र ही मानते है ज्योतिषशाश्त्र में | राहु एक छाया ग्रह है | राहु ग्रह पहले बाधाएँ लाता है बाद में फल दिलाता है | एक तरह से देखा जाय तो राहु अंधकारमय परिस्थिति ला देता है |
धन स्थान में बिराजमान मंगल ग्रह | भारत का राजकोष कभी कम करने देगा नहीं परन्तु आयुष्य स्थान पर ( सप्तम द्रष्टि ), विद्या/संतान स्थान ( चतुर्थ द्रष्टि ), धार्मिक स्थान ( अष्टम द्रष्टि ) से देखता है, इसलिए कह सकते है की भारत के रहवासी बीमारी से बाहर आ सकते हैं , धार्मिकता बनी रहती हैं |
पराक्रम भाव ( तृतीय स्थान ) पर बिराजमान पांच ग्रह | ज्योतिषशाश्त्र में पाँच ग्रह जब इकठा होते है तब " परिव्राजक योग " होता है | हम भारतीय ज्यादातर साधु,संत, महात्मा को ही मान-सन्मान प्रदान करते हैं |
एक बात पर ध्यान देना चाहिए की,
सूर्य के साथ चन्द्र हो तब अन्धकार,
चन्द्र के साथ शनि तब मानसिक संताप,
शुक्र - बुध - शनि = मित्र है |
और, पराक्रम भाव में होने के कारण हम सब भारतीय पराक्रमी ही हैं |
हम सब आर्य के ही संतान हैं |
MEHTA JAY JAGDISHBHAI
SHREE BRAHMANI JYOTISH
GANDHIDHAM ( KACHCHH )
( PART 2 - COMING SOON )
भारत की कुंडली के बारे में देखा जाय तो, भारत के काल के बारे में नहीं पर हम सिर्फ और सिर्फ आज़ादी के वक्त की कुंडली पर ही हम यह सोच सकते हें की हमें क्या करना होगा, कब कौन-सी मुश्केलियाँ आ सकती है |
भारत देश सन 1947 , अगस्त , 14/15 की रात 12 बजे हमें आज़ादी मिली | उस समय की कुंडली को देखे तो,
वृषभ लग्न बैठता है , वृषभ राशि का स्वामी शुक्र जो की कर्क राशि में मित्र और सम ग्रहों के साथ बिराजमान है | ( मैंने कुंडली का चित्र उपर रखा हुआ है | आप देख सकते है | )
वृषभ लग्न के अंदर बिराजमान राहु ग्रह | राहु - शनि ग्रह का ही परम मित्र ही मानते है ज्योतिषशाश्त्र में | राहु एक छाया ग्रह है | राहु ग्रह पहले बाधाएँ लाता है बाद में फल दिलाता है | एक तरह से देखा जाय तो राहु अंधकारमय परिस्थिति ला देता है |
धन स्थान में बिराजमान मंगल ग्रह | भारत का राजकोष कभी कम करने देगा नहीं परन्तु आयुष्य स्थान पर ( सप्तम द्रष्टि ), विद्या/संतान स्थान ( चतुर्थ द्रष्टि ), धार्मिक स्थान ( अष्टम द्रष्टि ) से देखता है, इसलिए कह सकते है की भारत के रहवासी बीमारी से बाहर आ सकते हैं , धार्मिकता बनी रहती हैं |
पराक्रम भाव ( तृतीय स्थान ) पर बिराजमान पांच ग्रह | ज्योतिषशाश्त्र में पाँच ग्रह जब इकठा होते है तब " परिव्राजक योग " होता है | हम भारतीय ज्यादातर साधु,संत, महात्मा को ही मान-सन्मान प्रदान करते हैं |
एक बात पर ध्यान देना चाहिए की,
सूर्य के साथ चन्द्र हो तब अन्धकार,
चन्द्र के साथ शनि तब मानसिक संताप,
शुक्र - बुध - शनि = मित्र है |
और, पराक्रम भाव में होने के कारण हम सब भारतीय पराक्रमी ही हैं |
हम सब आर्य के ही संतान हैं |
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