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Showing posts from March, 2019

ईशावास्योपनिषत्

विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयं सह । अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययामृतमश्नुते ।। (ईशावास्योपनिषत् , मंत्र ११) [यः विद्यां च अविद्यां च तद् उभयं सह वेद (सः) अविद्यया ...

Vimshotari Mahadasha

ग्रहों का विशेष फल देने का समय तथा अवधि भी निश्चित है। चंद्रनक्षत्र का व्यतीत तथा संपूर्ण भोग्यकाल ज्ञात होने से ग्रहदशा ज्ञात हो जाती है।ग्रह अपने शुभाशुभ प्रभाव विशे...

Brahmin

मैत्री समस्तभूतेषु ब्राह्मणस्योत्तमं_धनम् ।। ( विष्णुपुराणम् अ.०८ श्लोकः २४ ) सम्पूर्ण प्राणियोंमें मैत्री रखना ही ब्राह्मण का परम धन है। Keeping friendships with whole beings is the ultimate wealth of the Brahmin. 🙏🏻

Vastu

नाच्छादितमकपाटम् वास्तुशांतिं बलि विना । विप्रपूजनहीनं तु प्रवेशं दुःख दायकम्। अर्थात :- विना छाये(छत) तथा कपाट(द्वार) से हीन , वास्तुशांति, बलि और ब्राह्मणभोजन से रहित ग...