Kemdrum Yog , Durudhara Yog

उत्पन्नभोगसुखभुग् धनवाहनढ्यस्त्या ,
गान्वितो दुरुधराप्रभवः सुभृत्यः ।
केमद्रुमे मलिनदुःखितानीचनिः स्वाः ,
प्रेष्याः खलाश्च नृपतेरपि वंशजाता ।।
( बृहज्जतकम् अ-१३ , श्लोक-६ )

*दुरुधरा योग* :-

जन्मकुंडली में चन्द्र से दुसरे भाव में ग्रह हो और चन्द्र से बारहवें भाव में कोई ग्रह हो तब दुरुधरा योग का निर्माण होता है। दुरुधरा योग में उत्पन्न जातक सुखी होता है , धनाढ्य , वाहनों से सुसम्पन्न , दानप्रिय , अच्छा चरित्रवाला होता है।

*केमद्रुम योग* :-

जन्मकुंडली में चन्द्र से दुसरे और बारहवें स्थान में कोई भी ग्रह न हो तब इस केमद्रुम योग का निर्माण होता है। केमद्रुम में समुत्पन्न जातक, यदि राजवंश में भी उत्पन्न क्यूं न हुआ हो फिर भी वह जातक मलिन , दुःखी , दुष्कर्म करने वाला , धनहीन बन जाता है।

*MEHTA JAY JAGDISHBHAI*

*SHREE BRAHMANI JYOTISH CONSULTANT*

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