नारी
#यत्र #नार्यस्तु #पूज्यन्ते #रमन्ते #तत्र #देवताः।
जहां पर / घर पर स्त्री की पूजा ( आलोचना नहीं बल्कि , स्त्री की रक्षा की जाती हो ) होती है वहां पर देवताओं खेलते ( रहते हैं , साक्षात्कार होता है ) है।
स्त्री को पढ़ना चाहिए किन्तु पढ़ाई का असर खुद के वैवाहिक जीवन पर होता है तब पढ़ाई का कुछ मतलब नहीं रहता । पढ़ाई का अर्थ है , जब आपके पतिदेव की परिस्थिति अच्छी नहीं होती है तब आप उन्हें सहायता कीजिए , आपकी पढ़ाई का सही अर्थ तब होगा।
एवं...
पतिदेव को भी अपनी लक्ष्मिजी ( पत्नी ) की क्या इच्छाएं है वह भी ध्यान में रखनी चाहिए , नहीं की सब के सामने उनको डांटना चाहिए , कुछ भी नहीं बोलना चाहिए।
नोंध :- पति-पत्नी दोनों को एक-दूसरे को साथ देना चाहिए।
अस्तु।🙏
( कहीं भी क्षती हो तो माफ़ करना । )
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